
5 दिसंबर को व्लादिमीर पुतिन भारत क्यों आए?
भारत–रूस संबंध, समझौते और वैश्विक राजनीति पर असर
5 दिसंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक, आर्थिक, सैन्य और भू-राजनीतिक कारण जुड़े हुए थे।
आज की वैश्विक परिस्थिति—रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, ऊर्जा संकट और बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व की ओर बढ़ते कदम—इन सबके बीच यह दौरा भारत और रूस दोनों के लिए निर्णायक रहा।
भारत–रूस संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और रूस के संबंध शीत युद्ध के समय से ही मजबूत रहे हैं। सोवियत संघ के समय से रूस ने:
संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन किया
रक्षा उपकरणों की आपूर्ति की
अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीक में सहयोग किया
भारत भी हमेशा रूस के साथ विश्वासपूर्ण और स्थिर संबंध बनाए रखने वाला देश रहा है। इसी वजह से आज भी दोनों देशों के संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” कहा जाता है।
पुतिन के भारत दौरे के प्रमुख कारण
1️⃣ वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखना
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में रूस चाहता है कि:
भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश उसके साथ संबंध बनाए रखें
यह संदेश जाए कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला नहीं है
भारत की नीति हमेशा से रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की रही है, यानी किसी एक गुट के दबाव में न आकर अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेना।
2️⃣ रक्षा सहयोग को और मजबूत करना
भारत का रक्षा क्षेत्र लंबे समय से रूस पर निर्भर रहा है।
भारत की सेना, वायुसेना और नौसेना में रूस निर्मित हथियारों का बड़ा योगदान है
S-400 मिसाइल प्रणाली, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, टैंक आदि रूस से मिले हैं
इस दौरे में:
रक्षा उपकरणों की सप्लाई जारी रखने
तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer)
भारत में स्थानीय उत्पादन (Make in India)
पर चर्चा हुई।
3️⃣ ऊर्जा सुरक्षा और तेल-गैस आपूर्ति
भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और रूस एक बड़ा ऊर्जा उत्पादक।
रूस ने भारत को तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया
रियायती दरों पर तेल सप्लाई जारी रखने पर सहमति बनी
परमाणु ऊर्जा सहयोग, खासकर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के विस्तार पर बातचीत हुई
ऊर्जा सुरक्षा भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है, और रूस इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
4️⃣ व्यापार और आर्थिक सहयोग का विस्तार
भारत और रूस ने तय किया कि:
द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा
व्यापार केवल तेल तक सीमित न हो, बल्कि:
कृषि
फार्मास्यूटिकल्स
समुद्री उत्पाद
बंदरगाह और शिपिंग
लॉजिस्टिक्स
स्वास्थ्य और शिक्षा
जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ाया जाए
इसके लिए कई MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए।
5️⃣ सैन्य लॉजिस्टिक्स और आपसी सहयोग
भारत और रूस के बीच Reciprocal Exchange of Logistics Agreement (RELOS) पर सहमति जताई गई। इसके तहत:
दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगी
संयुक्त सैन्य अभ्यास और आपदा राहत में सहयोग बढ़ेगा
समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी

भारत के लिए इस दौरे का महत्व
✅ भारत को सस्ती ऊर्जा और मजबूत रक्षा सहयोग मिलता रहेगा
✅ “Make in India” को रूस से तकनीकी सहयोग मिलेगा
✅ वैश्विक राजनीति में भारत की स्वतंत्र पहचान मजबूत होगी
✅ पश्चिम और रूस दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति को बल मिलेगा
रूस के लिए इस दौरे का महत्व
✅ भारत जैसे बड़े देश का समर्थन और विश्वास
✅ पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में मदद
✅ एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना
✅ भारत के बड़े बाजार तक पहुंच
बहुध्रुवीय विश्व की ओर संकेत
इस यात्रा में दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि:
विश्व केवल एक या दो शक्तियों द्वारा संचालित न हो
एशिया, अफ्रीका और विकासशील देशों की भूमिका बढ़े
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बने
यह दृष्टिकोण भारत और रूस दोनों की साझा सोच को दर्शाता है।
“ONE EARTH, ONE FAMILY, ONE FUTURE”